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सैन्य अधिकारियों को मिलेगा एआई प्रशिक्षण; ड्रोन उड़ाना एक आवश्यक कौशल होगा

  भारतीय सेना ने भविष्य के युद्धों की तैयारी के लिए अपना नया सिद्धांत जारी किया है। इस नए सिद्धांत के अनुसार, सेना के अधिकारियों को निर्णय लेने में मदद के लिए अब कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) में विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा। साथ ही, 12 लाख कर्मियों वाली पूरी भारतीय सेना के लिए ड्रोन उड़ाना एक अनिवार्य कौशल बनाया जाएगा।


रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने नई दिल्ली में चल रहे आर्मी कमांडर कॉन्फ्रेंस के आखिरी दिन 'इंडियन आर्मी लैंड वॉरफेयर डॉक्ट्रिन 2026' नाम से यह सिद्धांत जारी किया। सूत्रों के मुताबिक, सेना अब नई तकनीक, ड्रोन और सटीक निशाना लगाने वाले हथियारों के इस्तेमाल पर ज्यादा ध्यान दे रही है। सैन्य अधिकारियों के लिए त्रिस्तरीय एआई प्रशिक्षण कार्यक्रम भी डिजाइन किया गया है।


यह नया सिद्धांत हाल के संघर्षों (जैसे ऑपरेशन सिंधुर) से सीखे गए सबक पर आधारित है। आज युद्ध में ड्रोन, सतत निगरानी और सूचना प्रणालियाँ बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। यह नया सिद्धांत 'डिफेंस फोर्सेज विजन 2047' का हिस्सा है, जो तीनों सेनाओं की अंतरसंचालनीयता को बढ़ाने पर जोर देता है।

यह सिद्धांत 'आत्मनिर्भरता' यानी घरेलू हथियारों के इस्तेमाल पर भी विशेष जोर देता है। युद्ध के दौरान सैनिकों को हथियार, गोला-बारूद, भोजन और पानी की निरंतर आपूर्ति सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण माना जाता है। इसके अलावा, अगर दुश्मन सिग्नल या संचार नेटवर्क जाम भी कर दे, तो भी सेना की मशीनें और हथियार बिना किसी रुकावट के काम करते रहेंगे।

जमीन पर काम करने वाले सैन्य कमांडरों को अब खतरे, भूगोल और पर्यावरण के आधार पर मौके पर ही निर्णय लेने की अधिक स्वतंत्रता दी जाएगी। सेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ के नेतृत्व में 21 अक्टूबर को शुरू हुए तीन दिवसीय सम्मेलन में विभिन्न सुरक्षा मुद्दों और सेना अभियानों के डिजिटलीकरण पर भी खुलकर चर्चा हुई.

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