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बच्चों के अपहरण के मामले: बच्चों के अपहरण के मामलों की समय पर जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट में PIL फाइल की गई

  बच्चों के अपहरण के मामले: सुप्रीम कोर्ट में एक पब्लिक इंटरेस्ट लिटिगेशन (PIL) फाइल की गई है, जिसमें बच्चों के अपहरण और किडनैपिंग के मामलों की जांच के लिए पूरे देश में एक जैसा तरीका अपनाने की मांग की गई है, जिसमें समय पर जांच और तेजी से ट्रायल शामिल हो।

एडवोकेट अश्विनी कुमार उपाध्याय की फाइल की गई इस पिटीशन में केंद्र और राज्यों से ऐसे मामलों के लिए स्टैंडर्ड क्वेश्चनेयर और स्पेशल जांच के तरीके तैयार करने की मांग की गई है।

यह भी मांग की गई है कि जांच ACP या SHO से नीचे के रैंक के अधिकारी से न कराई जाए और MP और MLA के लिए स्पेशल कोर्ट की तरह डेडिकेटेड कोर्ट बनाए जाएं ताकि बच्चों के अपहरण के मामलों का निपटारा एक साल के अंदर किया जा सके।

पिटीशन में आरोपियों और उनके परिवार के सदस्यों की चल और अचल प्रॉपर्टी को जब्त करने और मनी लॉन्ड्रिंग, बेनामी प्रॉपर्टी और काले धन से जुड़े कानूनों को लागू करने की भी मांग की गई है।

इसमें यह भी मांग की गई है कि किडनैपिंग की सज़ाएँ एक साथ देने के बजाय एक के बाद एक हों, ताकि डर का माहौल बने।

याचिका में आरोप लगाया गया है कि लापता बच्चों से जुड़ी शिकायतों की FIR दर्ज करने और जांच में देरी से उनकी रिकवरी में रुकावट आती है और उन्हें ट्रैफिकिंग, यौन शोषण, जबरन मजदूरी और गैर-कानूनी गोद लेने के खतरे का सामना करना पड़ता है।

यह भी आरोप है कि लापता बच्चों से जुड़ी शिकायतों को कभी-कभी FIR के बजाय सिर्फ़ “गुमशुदगी” या “लापता” रिपोर्ट के तौर पर दर्ज किया जाता है, जिससे पूरी क्रिमिनल जांच में देरी होती है।
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