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एसआईआर प्रक्रिया में कोई रुकावट बर्दाश्त नहीं की जाएगी: सुप्रीम कोर्ट

  सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची (एसआईआर) के विशेष पुनरीक्षण पर सख्त रुख अपनाते हुए कहा है कि किसी को भी इस प्रक्रिया में बाधा डालने की इजाजत नहीं दी जाएगी। इस संबंध में चुनाव आयोग से शिकायत की गई थी कि उनके नोटिस जला दिए गए और इस मामले में कोई एफआईआर दर्ज नहीं की गई. इस संबंध में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी द्वारा मतदाताओं के नाम सूची से बाहर किये जाने को लेकर जतायी गयी आशंका को लेकर एक याचिका भी दायर की गयी थी.

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने चुनाव आयोग के इस दावे पर संज्ञान लिया कि कुछ शरारती तत्वों ने आयोग के नोटिस जला दिये थे. इस पर कोर्ट ने पश्चिम बंगाल के डीजीपी को हलफनामा दाखिल करने का आदेश दिया है.

अदालत ने राज्य सरकार द्वारा उपलब्ध कराए गए 8,505 अधिकारियों को इस कार्य के लिए प्रशिक्षित और तैनात करने की अनुमति दी है, लेकिन यह भी स्पष्ट किया है कि मतदाता सूची पर अंतिम निर्णय चुनाव अधिकारियों का होगा। केंद्र सरकार की ओर से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि यह संदेश जाना चाहिए कि देश का संविधान सभी राज्यों पर समान रूप से लागू होता है. दूसरी ओर, ममता बनर्जी के वकील ने चिंता जताई कि इस प्रक्रिया से बड़े पैमाने पर पात्र मतदाताओं का बहिष्कार हो सकता है, जिस पर अदालत ने आवश्यक दिशानिर्देश जारी करने का आश्वासन दिया।
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